पापा की नई पोस्टिंग के बाद
नई जगह पर पहुंचे गुड्डू ने घर को व्यवस्थित करने की शुरुआत टीवी का एंटिना कसने से की। पड़ोस
का एक बच्चा सुबह से ही स्टेपनी बना हाथ बंटा रहा था। दोनों ने अभी छत पर पाइप
लगाकर बुस्टर का तार जोड़ना शुरु ही किया कि खड़खड़ाती
खटारा साइकिल पर सवार, एक कल्कि अवतार दरवाजे पर आ पहुंचा।
दुबला-पतला एकदम लिकपिक, काला- कलूटा, धंसे गाल- घुंघराले बाल
उसे देखते ही मोती तकरीबन चीखा..का रे रजुआ यहां कहां...
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घर में टीवी है क्या ?
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हां है, उठाकर ले जाओगे
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नहीं देखने आया था, एंटिना कसवाना है, हम कसते हैं।
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तेरा बाप हवाई जहाज भी उतारता है, उसी का पंचर साटो, यहां अपने काम भर काबिल लोग हैं।
तबतक राजू की निगाह कमरे के कोने में रखे सीलिंग फैन,फ्रीज और म्यूजिक सिस्टम पर पड़ चुकी थी।
उसने गुड्डू की तरफ इशारा करते हुए पूछा
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ये सब खुद से ही कस लेंगे
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ये लोगों का दिमाग भी कसते हैं, कसवाना है
राजू झेंप गया। थोड़ी देर तक देखता रहा फिर अपनी जिस खटारा साइकिल पर जॉकी बना आया था शूमाकर
सा लौट गया। लेकिन
मोती ऑन रहा..
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कहीं कुछ हो ये साला कुत्ता सूंघता हुआ आ पहुंचता है।
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कौन है ये
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साले रामप्रकाश की सबसे बड़ी और उतनी ही हरामी औलाद है।
ये नाम दिन में तीसरी बार सुनने को मिला तो इस बार
पूछ ही लिया
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ये रामप्रकाश कौन है
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मत पूछिए उस कमीने के बारे में, अरे वो साला ऑलराउंडर है।
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उसे गाली क्यूं दे रहे हो।
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रामप्रकसवा को तो सब कोई गाली देता है, इसमें नया क्या है। वो साला है ही ऐसा।
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आखिर वो क्या करता है।
एक काम करे तो बताउं फिर पिंटू सिर पर ऐसे हाथ रखकर बोला मानो
चार्ल्स शोभराज की बॉयोग्राफी बयां करनी हो, उल्टा गुड्डू से ही पूछा.. क्या नहीं करता।
फिर खुद ही बताने लगा..
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इंजेक्शन देने का काम करता है, एक इंजेक्शन का दो रुपया लेता है। सत्तू की दुकान चलाता है, तीज त्यौहार में हलवाई बनकर बैठ जाता है। बैचलर हाकिमों को ब्रेकफास्ट, लंच और डीनर की फ्री होम डिलिवरी देता है। डॉक्टर चाचा भी तो इतने दिन से वहीं खा रहे थे, रजुआ खाना पहुंचा जाता था। अभी अपना टिफिन ले जाने ही तो आया था। हां, राजमिस्त्री है, बढ़ई है, साइकिल ठीक करने की भी दुकान है।
गुड्डू सोच रहा था ये लिंयोनार्दी द विंची का देसी संस्करण है क्या, तभी मोती ने जोड़ा ।
साला सूद पर पैसा भी चलाता है, और जानते हैं झाड़फूंक भी जानता है, लोगों की मति मार लेता है।
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वो कैसे...
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कैसे चलके देख लीजिए...मारा है ना, मुंशिया उसका बिन खरीदा गुलाम है।
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गुलाम मतलब
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मुंशिया दिनभर रमप्रकसवा की सत्तू दुकान
पर बैठता है,गोबर काछता है, झाड़ु बहारु भी करता है, उसकी बीवी नर्स है और जितना
कमाती है सब पैसा रमप्रकसवा को आकर दे जाती है, मुंशिया टुकुर टुकुर ताकता रहता है
उससे तो बोलती भी नहीं।
इ साला रजुआ है ना, बिलकुल अपने बाप पर गया है। बाप बेटे साले सब चोरकट हैं।
अभी तक गुणवान होना समाज में शान की बात समझी जाती रही है, रामप्रकाश में ऐसा क्या था जो इतनी प्रोफेशनल डिग्री-डिप्लोमा के बावजूद पब्लिक परसेप्शन एक महान चोरकट का था।
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